हिन्दू धर्म शंका-समाधान
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दयाल प्रसाद खरे
प्रस्तावना
“श्रीराधा रानी-भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी, आराध्य एवं आराधिका” पुस्तक लिखने के बाद इच्छा हुई थी कि अभी लगभग एक वर्ष तक सिर्फ आध्यात्मिक पुस्तकें पढ़कर अपना और ज्ञानवर्धन करूँ । परन्तु, टेलीविज़न पर कुछ राजनेताओं द्वारा हिन्दू-धर्म के विरुद्ध अनर्गल प्रलाप सुन-सुन कर मन आहत हो जाता था । ऐसा लगता था जैसे अपने धर्मग्रंथों का बिना गहन अध्ययन किये या बिना किसी समर्थ गुरु से ज्ञान प्राप्त किये ही इस प्रकार के बहस करते थें और आज भी कर रहे हैं, जैसे उनका एकमात्र उद्देश्य ही अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए समाज का बंटवारा और सनातन धर्म को नीचा दिखाना ही है । रही-सही कसर कुछ तथाकथित स्वघोषित विद्वान कथावाचकों ने भी पौराणिक कथाओं को बढ़ा-चढ़ा कर पूरी कर दी है । फलतः इन जैसे कथावाचकों ने भी सनातन धर्म पर आक्षेप लगाने का कुतर्की आलोचकों को खूब मौका दिया है और दे रहे हैं । यह भी देखता हूँ कि आज के युवा वर्ग में भी अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास की जानकारी बहुत ही कम है और न ही जानने की उत्कंठा है । बहुत से लोग तो धार्मिक पात्रों और अवतारों के बारे में उचित जानकारी के अभाव में इन कुतर्की आलोचकों के अनाप-शनाप बातों पर विश्वास भी कर लेते पाए गए हैं ।
इन्हीं कारणों से कुछ चर्चित शंकाओं/आक्षेपों का समाधान लिखने का प्रयास किया जा रहा है जिससे की लोग दिग्भर्मित न हो सके । मैं सनातन धर्म का कोई विशेषज्ञ तो नहीं हूँ, फिर भी अपने अल्पज्ञान से कुछ शंकाओं/आक्षेपों का समाधान और छोटी सी प्रश्नोत्तरी लिख कर जिज्ञासु पाठकवृन्द के समक्ष रखने का प्रयास मात्र किया जा रहा है ।
विनीत
दयाल प्रसाद खरे
-:शंका सूची:-
१. इस्लाम धर्म में परमात्माकृत एक धर्म पुस्तक है जिसे क़ुरआन कहते है और सभी मुसलमान इसे ईश्वरीय वाणी मानते है । इसी प्रकार ईसाइयों की धर्म पुस्तक बाइबल है, किन्तु हिन्दू धर्म में एक नहीं, अनेकों धर्म पुस्तकें है । जैसे चार वेद, अठारह पुराण, अनेक उपपुराण, अनेक उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, अनेक स्मृतियाँ आदि । कुछ लोग तो कहने लगे हैं कि हिन्दूधर्म, धर्म नहीं कपोल कल्पनाओं, दन्त कथाओं और अंधविश्वासों से भरा हुआ है ।
२. कुरआन तथा बाइबिल की तरह वेद में भी मूर्ति पूजा मना है । फिर भी हिन्दू मूर्ति पूजा क्यों करते हैं, और एक देवता की नहीं बल्कि ३३ करोड़ देवी-देवता की पूजा करते हैं ?
३. आजकल अन्य धर्मों के ही नहीं बल्कि हिन्दू धर्म के भी कुछ तथाकथित जानकार शिवलिंग पूजा का विरोध कर तरह-तरह के अश्लील तर्क देते हैं । आखिर शिवलिंग का सच क्या है?
४. मनुस्मृति पर विवाद क्यों ? क्या मनुस्मृति ने जाति-व्यवस्था की नींव डाली थी ? क्या मनुस्मृति में शूद्रों और नारी जाति के लिए भेदभाव की नीति अपनायी गयी है? क्या मनुस्मृति ब्राह्मण वर्ण-व्यवस्था की पोषक है?
५. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने शूद्र ऋषि शम्बूक का वध क्यों किया ? क्या राम-राज्य में शूद्रों का तप करना वर्जित था ? क्या श्रीराम ने एक धोबी के कहने मात्र से अपनी पत्नी देवी सीता का त्याग कर किया ? क्या श्रीराम स्त्री एवं दलित विरोधी थें?
६. क्या गोस्वामी तुलसीदास ब्राह्मणवाद के पोषक तथा जाति-व्यवस्था के समर्थक थे ? क्या रामचरित मानस शूद्र और नारी विरोधी है?
७. क्या सनातन धर्म लोगों को धर्म और जाति के आधार पर बांटता है ?
८. ब्रह्मा जी और सरस्वती माता को लेकर फैली भ्रांतियों का सच क्या है?
९. कुछ आलोचकों को कहते सुना जाता है कि महादेव शंकर कैसे भगवान थें, जो अपनी पत्नी को छोड़कर भस्मासुर के डर से भागते रहें; जिन्हें विष्णु भगवान ने मोहिनी अवतार लेकर बचाया । सच क्या है?
१०. भगवान राम ने वानरराज बाली को पेड़ के पीछे से छिपकर क्यों मारा ?
११. हिन्दू धर्म में लोग पीपल, वटवृक्ष, नीम, आवंलावृक्ष, केला, तुलसी आदि की पूजा क्यों करते हैं ?
१२. हिन्दू विवाहित औरतें अपने मांग में सिंदूर क्यों लगाती हैं ?
१३. सामान्य और संक्षिप्त प्रश्नोत्तरी (प्रश्न १ से ३७)
शंका 1:
इस्लाम धर्म में परमात्माकृत एक धर्म पुस्तक है जिसे क़ुरआन कहते है और सभी मुसलमानइसे ईश्वरीय वाणी मानते है । इसी प्रकार ईसाइयों की धर्म पुस्तक बाइबल है, किन्तु हिन्दू धर्म में एक नहीं, अनेकों धर्म पुस्तकें हैं । जैसे- चार वेद, अठारह पुराण, अनेक उपपुराण, अनेक उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, अनेक स्मृतियाँ आदि । कुछ लोग तो कहने लगे हैं कि हिन्दूधर्म, धर्म नहीं कपोल कल्पनाओं, दन्त कथाओं और अंधविश्वासों से भरा हुआ है ।
शंका निवारण: सनातन धर्म जिसे हम बोलचाल की भाषा में हिन्दू धर्म कहते हैं, विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है । प्रो. जैकोबी ने भी नक्षत्रीय गणना के आधार पर सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद का रचना काल ईसा से ४५०० वर्ष पूर्व का बताया था । बाल गंगाधर तिलक ने भी अपनी पुस्तक “The Arctic Home in the Vedas” में प्रो. जैकोबी की गणना का ही समर्थन किया है । कहने का अर्थ यह है कि आज से लगभग ६५०० से ७००० वर्ष पूर्व ही सनातन धर्म के प्रथम धर्मग्रन्थ की रचना हुई थी । हिन्दू धर्म (जिसे सनातन या वैदिक धर्म कहना ज्यादा अच्छा होगा) की उत्पत्ति वास्तव में वेदों के रचना-काल से काफी पहले का माना जाता है ।
जिस प्रकार इस्लाम के अनुसार इस धर्म में परमात्मा-कृत एक धर्म पुस्तक है जिसे क़ुरआन कहते हैं, ईसाइयों की धर्म पुस्तक बाइबल है, उसी प्रकार सनातन धर्म का भी एकमात्र परमात्मा-कृत धर्म-पुस्तक वेद ही है। हिन्दुओं के वास्तविक धर्मग्रंथ तो वेद ही हैं । वेदों का सार उपनिषद और वेदांत है । गीता को तो ज्ञान का सागर भी कह सकते हैं । जहाँ तक अन्य धर्म-पुस्तकें जैसे-पुराण, ब्राह्मणग्रन्थ आदि हैं; तो इसका उत्तर यह है कि इतना प्राचीन धर्म होने के कारण, जो उस समय समस्त जम्बूद्वीप (वर्तमान एशिया महाद्वीप) में फैला हुआ था, समय-समय एवं विभिन्न स्थानों पर विभिन्न मतों के विद्वानों ने बाद के शताब्दियों में अपनी-अपनी तरह से विभिन्न ग्रन्थ लिखे हैं । रामायण, रामचरित मानस और महाभारत महाकाव्य वास्तव में आस्था से जुड़ा हुआ एक इतिहास ग्रन्थ है । अंत में पुनः कहना है कि सनातन धर्म का एकमात्र धर्मग्रन्थ सिर्फ वेद ही है ।
लेखक: दयाल प्रसाद खरे
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